
一 | डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत को निशाना बनाने और बड़े खरीदार चीन पर प्रतिबंध नहीं लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है। उनका कहना है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। डेमोक्रेट्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ''बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदने के लिए चीन या अन्य देशों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाकर उसे निशाना बना रहे हैं, जिससे अमेरिकियों को नुकसान पहुंच रहा है और इस प्रक्रिया में अमेरिका-भारत संबंध खराब हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे यह यूक्रेन के बारे में है ही नहीं।'',कमेटी ने न्यूयार्क टाइम्स के एक लेख का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था, ''अगर ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने वाले किसी भी देश पर सेकेंडरी प्रतिबंधों लागू करने का विकल्प चुनता तो एक बात होती। लेकिन केवल भारत पर ध्यान केंद्रित करने के निर्णय के परिणामस्वरूप शायद सबसे भ्रामक नीतिगत परिणाम सामने आए हैं: चीन, जो रूसी ऊर्जा का सबसे बड़ा आयातक है, अभी भी रियायती दरों पर तेल खरीद रहा है, और अब तक वह ऐसी सजा से बचा हुआ है।'',(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) यह भी पढ़ें- सस्ते रूसी तेल से एक साल में भारत के कितने पैसे बचे? ग्लोबल रिसर्च फर्म ने जारी की रिपोर्ट; हैरान कर देंगे आंकड़े。 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत को निशाना बनाने और बड़े खरीदार चीन पर प्रतिबंध नहीं लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है। उनका कहना है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। डेमोक्रेट्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ''बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदने के लिए चीन या अन्य देशों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाकर उसे निशाना बना रहे हैं, जिससे अमेरिकियों को नुकसान पहुंच रहा है और इस प्रक्रिया में अमेरिका-भारत संबंध खराब हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे यह यूक्रेन के बारे में है ही नहीं।'',कमेटी ने न्यूयार्क टाइम्स के एक लेख का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था, ''अगर ट्रंप प्रशासन रूसी तेल खरीदने वाले किसी भी देश पर सेकेंडरी प्रतिबंधों लागू करने का विकल्प चुनता तो एक बात होती। लेकिन केवल भारत पर ध्यान केंद्रित करने के निर्णय के परिणामस्वरूप शायद सबसे भ्रामक नीतिगत परिणाम सामने आए हैं: चीन, जो रूसी ऊर्जा का सबसे बड़ा आयातक है, अभी भी रियायती दरों पर तेल खरीद रहा है, और अब तक वह ऐसी सजा से बचा हुआ है।'',(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) यह भी पढ़ें- सस्ते रूसी तेल से एक साल में भारत के कितने पैसे बचे? ग्लोबल रिसर्च फर्म ने जारी की रिपोर्ट; हैरान कर देंगे आंकड़े。
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Published on:15:02:33